Wednesday, December 3, 2014

आंसुओ से पलकों को

आंसुओ से पलकों को भिगोना चाहता हूँ 
आज मैं खुल कर रोना चाहता हूँ।  
जो खो गया है, मेरा बीता हुआ कल, 
मैं उसको फिर से पाना चाहता हूँ। 
थक चुका हूँ रो रो कर अब मैं, 
अब पल दो पल मैं मुस्कुराना चाहता हूँ। 
अपनों ने तो दिए है मुझे धोखे बहुत, 
अब मैं दुश्मनो को भी अजमाना चाहता हूँ। 
वही बात रह रह कर याद आती है मुझे,
जिसे मैं हमेशा के लिए भूल जाना चाहता हूँ 
कहने को तो बहुत कुछ है मेरे दोस्तों,
पर  कुछ बाते मैं अपने दिल में छुपाना चाहता हूँ। 

Tuesday, December 2, 2014

करो चाहे कितना भी


करो चाहे कितना भी भला किसी का 
यहाँ सिर्फ बुराई ही मिलती है 
मोहब्बत करो चाहे तुम कितनी भी किसी से 
यहाँ सिर्फ बेवफाई ही मिलती है 
जब तक रौशनी है तो देते है साथ सभी 
अँधेरे में तो अपनी परछाई भी नही मिलती है 


Monday, November 24, 2014

अभी गम भी नया है

अभी गम भी नया है और दर्द भी ताज़ा है 
एक दिल था पास अब वो भी आधा है 
जाने क्यों लोग वादा करके भूल जाते है। 
जो तोडा है उसने वो बस कल का ही वादा है। 
टूट तो गया हूँ मैं, पर संभल भी जाऊंगा
ये मेरा आज खुद से वादा है 

Monday, November 10, 2014

जिंदगी - अध्याय - दो


मुझे अपनी लाइफ में कोई खास ख़ुशी नहीं मिलती, पर फिर भी मैं खुश रहने की कोशिश करता हूँ।  और मेरे खुश होने की वजह मेरे दोस्त ही हैं।  मेरे सभी दोस्तों की एहमियत अलग अलग है, कुछ मेरी परेशानी और मुसीबत में काम आते है तो कुछ मेरी उदासी में।  मुझे ईश्वर ने दोस्तों के रूप में ऐसा खज़ाना दिया है जिसके सामने पूरी दुनिया की दौलत भी कुछ नहीं है।  ये मेरे सगो से भी ज्यादा अपने हैं।  

किसी ने मुझसे कहा था की कभी किसी की आदत नहीं डालनी चाहिए, पर मेरी जिंदगी में २ ऐसे हैं जिनकी मुझे आदत है।  अगर एक भी दिन में उनसे बात न करू तो मुझे बेचैनी सी होती रहती है।  मैं इनकी ख़ुशी के लिए कुछ भी कर सकता हूँ, मैं ये नहीं कहता की मुझे दोनों से प्यार है, बस मैं साथ निभाना चाहता हूँ जब तक हूँ। 

प्यार का मतलब सिर्फ ये तो नहीं होता की हम किसी को पा ही ले, प्यार का मतलब तो ये होता है हम बस साथ दे उनका जब उन्हें किसी की जरुरत हो।  मैं बस ये ही कोशिश करता हूँ की वो सब खुश रहे।  मुझसे उनकी उदासी और दुःख देखा नहीं जाता।  

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आज मैं बहुत खुश हूँ, और खुश होने की बहुत सारी वजह हैं, एक तो आज ईद है और मेरे बहुत सारे दोस्त घर आ रहे है, दूसरा मेरे ऊपर अब किसी का कोई कर्जा नहीं हैं।  मेरी बीमारी में और वाइफ के ऑपरेशन में जो पैसे खर्च होने की वजह से मेरे ऊपर कर्ज सा हो गया था, कर्ज ज्यादा हो या काम टेंशन तो देता ही है।  अब बस मुझे 7000 रूपये और देने है। बस मेरी सैलरी मिल जाये फिर ये भी खत्म और मैं मुक्त हो जाऊँगा।  पर हम जैसा सोचते है वैसा कभी नहीं होता। 

मैं और मेरी वाइफ पुरे दिन काम में ही लगे रहे दोस्त आये और मस्ती की फिर सब चले गए। 

मुझसे ज्यादा वाइफ थक गयी थी, सारा काम उसने ही किया था तो थकना तो था ही, आज सब अच्छा रहा।  शाम को वाइफ बोली की मेरा खाना बनाने का मन नही कर रहा।  मैंने कहा की कोई नहीं मत बना मुझे भी भूख नहीं है,  तुझे लग रही है तो बहार से ले आता हूँ, तो वो बोली सुबह की सब्जी रोटी रखी है मैं वो खा लुंगी, मैंने कहा ठीक है फिर।  थोड़ी भूख तो मुझे भी लग रही थी पर मैंने कहा नही क्युकी बेचारी सुबह से काम में ही लगी हुई थी।  

10 बज रहे हैं, हम सोने जा रहे है।  

मेरे फोन की घंटी बजी।  मैंने देखा तो मेरी एक दोस्त का फोन आ रहा था, मैंने उठाया और हेलो की,
 
मैं : हेलो, हाँ जी बोलो 
दोस्त : आज मैसेज नही हो रहे इसलिए सोचा फोन करके गुड नाईट बोल दू, तुझे गुड नाईट बोले बिना नींद नहीं आती ना 
मैं : चल कोई नही सो जा 
दोस्त : यार तेरी एक हेल्प की जरुरत थी 
मैं : हाँ बोल क्या बात है 
दोस्त : मुझे 15000 रूपये की जरुरत है 
मैं : इतने पैसे की क्या जरुरत पड़ गयी अचानक 
दोस्त : जब मिलेगा तब समझा दूंगी तू बस ये बता मिल सकते हैं या नहीं 
मैं : तू जरुरत बता, उससे ही मैं समझ पाउँगा की प्रॉब्लम कैसी है और कोशिश करूंगा 
दोस्त : हमारे एक अंकल है वो मेरी सरकारी जॉब लगवा रहे है, उन्हें 20000 रूपये देने है, 5000 तो मैंने दे दिए अब 15000 रूपये देने है, मेरा दिमाग ख़राब हो रहा की बस 15000 रूपये की वजह से मैं रह जाउंगी, क्या करू कुछ समझ में नहीं आ रहा है 
मैं : चल कोई नही तू टेंशन मत ले मैं कल शाम तक तुझे कही न कही से कर के दे दूंगा।  
दोस्त : नही यार मुझे कल दोपहर तक देने है,
मैं : यार तुझे कल दोपहर तक देने हैं और तू मुझे 10 बजे बता रही है, मेरे पास पैसे है नही तो मैं इतनी जल्दी कैसे करू।  तुझे ये बात पहले से ही पता होगी और तू मुझे अब बता रही है 
दोस्त : अब तू ताने तो मार मत, मैंने सोचा हो जायेंगे तो तुझे क्यों परेशान करू और मेरा एक 10000 चेक क्लियर होने वाला है तो मैं 10 दिन में ही पैसे वापस कर दूंगी।  
मैं : चल छोड़, मैं तुझे अभी 5 - 10 मिनट में फोन कर के बताता हूँ 

फिर मैंने फोन काट कर अपने एक दोस्त को मिलाया तो उसने कहा मेरे पास इतने तो नही है 3000 रूपये तो है पर मैं कल शाम तक कर सकता हूँ, मैं कहा की कल दोपहर तक चाहिए तो वो बोला इतनी जल्दी तो नही हो सकते बाकि मैं कोशिश करूंगा। मैंने ठीक है कह कर फ़ोन काट दिया। 

फिर मैंने अपने दूसरे दोस्त को फ़ोन किया और पैसे के लिए कहा तो वो बोला मेरे पास तो नहीं है पर मैं अपने सर से बात करके सैलरी जल्दी ले लूंगा पर मैं कल ही बता पाउँगा सर से बात करके।  मैंने ठीक है कहा और उससे ये बोल दिया की मैं 10 दिन में तुझे वापस दे दूंगा और फ़ोन काट दिया। 

फिर मैंने उसे कॉल किया जिसे पैसे चाहिए थे, उससे कहा की पैसे का जुगाड़ हो जायेगा तू टेंशन मत ले, मैं सब कर दूंगा, तो बिना टेंशन लिए सो जा 

मैंने ऐसा बोल तो दिया था पर मैं खुद जनता था की पैसो का जुगाड़ हो भी पायेगा या नहीं।  मैं वापिस आ कर लेट गया।  वाइफ थक गयी थी तो वो सो रही थी पर मुझे नींद नही थी मेरे दिमाग में ये घूम रहा था की कैसे करू सब? फिर सोचा की मैं किसी एक के भरोसे नहीं रह सकता और पैसे दोपहर तक देने है इसलिए मुझे जिससे जितना मिलता है वही ले लेता हूँ।  यानि जिसके पास 3000 रूपये है उससे वो ले लेता हूँ, और मेरे पास 2000 रूपये है तो 5000 तो ये ही हो गए।  बाकि जो दोस्त एडवांस सैलरी लेने को कह रहा है वो कम से कम 5000 तो दे ही देगा तो 10000 हो जायेंगे बाकि 5000 वो खुद भी कर सकती है। हाँ ये ही ठीक रहेगा।  

पहले भी मैं इस लड़की की हेल्प कर चूका हूँ, एक बार इसके पापा का फ़ोन आया तो वो बहुत परेशान थे, उनका काम नहीं चल रहा था उन्होंने मुझसे पैसो को नहीं कहा था पर मुझे दुःख हो रहा था की वो परेशान हैं इसलिए मैंने उन्हें 4000 रूपये दे दिए थे फिर एक दिन ये खुद बहुत परेशान थी और मेरे काफी पूछने पर बताया था की किसी से इसके पापा ने 5000 रूपये लिए थे तो वो बार बार आ रहा है पैसे मांगने इसलिए टेंशन है, अभी भी पापा का काम सही नहीं चल रहा है, मैंने कहा तू टेंशन न ले मैं दे दूंगा और अगले दिन मैंने इसे 5000 रूपये दे दिए।  पर वो पैसे मैंने अपने पास से दिए थे और इस बार मैं मांग कर दे रहा हूँ, कही मैं खुद परेशानी में न फंस जाऊ।  क्युकी 15000 रूपये बहुत होते है अगर मुझे जल्दी वापिस न मिले तो मैं अपने दोस्तों की नज़र में झूठा भी बन जाऊंगा और कभी दुबारा अपने लिए भी मांग नहीं पाउँगा उनसे।  खैर ये बात बाद की है, देखा जायेगा जो होगा।  

बहुत देर तक मेरे दिमाग में बस बाते चलती रही और मैं ऐसे सोचते सोचते ही सो गया। 

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(अब जिसे पैसे चाहिए उसके बारे में बताता हूँ)

जिंदगी में दुःख और परेशानी हमेशा ही रहती है, ये लड़की मेरी लाइफ में तब आई थी जब मैं बहुत अकेला और उदास सा रहता था। एक दोस्त ने हमें मिलाया था फिर हम बहुत अच्छे दोस्त बन गए।  मेरे अंदर बहुत दुःख था।  उसका साथ मुझे अच्छा लगता था।  मैं अपने दिल की हर बात उससे कर लिया करता था।  ये भी मुझे बहुत मानती थी।  अपनी गली, मोहल्ला, घर-परिवार यहाँ तक की रिश्तेदार तक को मेरे बारे में बता रखा था।  इसके घर वाले भी सब मुझे बहुत पसंद करते है।  इसके पापा कहते है की उन्हें मेरे जैसा ही दामाद चाहिए और इसकी मम्मी कहती हैं की काश इसकी शादी ना हुई होती तो ये मुझसे ही इसकी शादी कर देती।  मैं भी इसके परिवार को अपना ही मानता हूँ।  मम्मी तो मुझे अपनी मम्मी ही लगती है। 


सब ठीक ही चल रहा था पर कुछ टाइम से ये कुछ बदल सी गयी थी या कह लो मैं ही ज्यादा सोचने लगा था।  इसमें फीलिंग नज़र नहीं आती मुझे।  न कभी मिलने के लिए कहना, न कभी इसका बात करने का मन करता है, बस एक सुबह मैसेज आ जाता है और फिर पुरे दिन कोई मतलब नहीं और रात को थोड़ी सी बात हो जाती है। ये ना कभी किसी बात पर नाराज़ होती है और न इसे मेरी कोई बात बुरी लगती है।  मेरी तो कई बार इस बात पर भी बहस हो जाती है की इसे कुछ बुरा क्यों नहीं लगता।  मैं किसी भी लड़की से बात करू इसे कोई जलन नहीं होती।  मैं इससे पूछता हूँ की तुझे डर नहीं लगता मुझे खोने का तो बोलती है की मैं क्यों डरु ? जो मेरा है वो कही नहीं जायेगा।  
हम्म्म उसकी बात भी ठीक है पर फिर भी मुझे ऐसा क्यों लगता है की प्यार और अपनापन अब इसकी सिर्फ बातो में ही रह गया है कोई फीलिंग नहीं है इसके अंदर।  मुझे कभी कभी ये भी लगता है की ये कुछ बाते भी छुपा लेती है और कुछ थोड़ा बहुत झूठ भी बोल देती है।  ऐसी बहुत सारी बाते है कई बार मुझे लगा।  हमारी जब भी बहस हुई तो हमेशा मैंने ही बोल चल सुरु की।  चाहे हमने २ दिन तक बात न की हो इसका कोई रिप्लाई नहीं आता।  और जब मैंने कहता हूँ की तू तो पूछ मत लेना तो बोलती है की मेरी गलती नहीं है, जब मेरी गलती होगी तो 100 बार भी मना लुंगी तुझे।  
मैंने पूछा की तेरे दोस्त कौन कौन है तो कहा की तेरे सिवा कोई नहीं है और जब मुझे पता चल तो मैंने पूछा तो बोली की यार इनसे कभी कभी कभी ही बात होती है अब इनके बारे में क्या बताऊ तुझे।  और अब ये तो कोई बात नहीं है की तुझसे बात करू तो मैं किसी और से न करू। हाँ सही कह रही थी वो मैं भी न कुछ ज्यादा ही सोच लेता हूँ, मेरी और दोस्त नहीं है क्या ? है भी तो क्या हुआ ? और ये भी हो सकता है मैं ही ज्यादा सोच रहा हूँ और ऐसा कुछ हो ही नहीं।  कई बार होता है की कोई अपनी फीलिंग दिखा नहीं पाता है इसका मतलब ये तो नहीं की वो गलत है।  बस ऐसे ही हमारे बीच चलता रहा सब।  


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सुबह 7 बजे उठते ही मैंने अपने दोस्त को फ़ोन किया ये सोच कर की कही वो ऑफिस न निकल जाये।  मुझे भी ऑफिस जाना है और ऑफिस से निकलने का टाइम नही मिलता फिर।  मैंने अपने दोस्त से कहा की तेरे पास 3000 रूपये है न तो तू मुझे वो ही दे दे बाकि मैं खुद कर लूंगा, उसने कहा ठीक है। 

रात कुछ बना नही था तो कुछ खा भी नहीं पाया बस चाय पी और ऑफिस के लिए निकल गया रस्ते में मैं अपने दोस्त से मिला।  तो उसने मुझे 1000 रूपये दिया और अपना ATM दिया और बोला की 1000 रूपये ये है और 2000 रूपये मेरे ATM में आज आने वाले है यानि मैं ऑफिस पहुँच कर ट्रांसफर करवा दूंगा तू निकाल लेना। मैंने ठीक है कहा और ऑफिस के लिए चल दिया।  

रास्ते में मैंने अपने दूसरे दोस्त को फ़ोन किया और पूछा की पैसो का जुगाड़ हो जायेगा या नही।  तो वो बोला की अभी ऑफिस नहीं पहुंचा, ऑफिस पहुँच कर सर से बात करके बता दूंगा।  

मैं ऑफिस पहुँच गया और फिर मेरे बस दो ही काम थे।  कभी पहले दोस्त को फ़ोन करके ये पूछ रहा था की कितनी देर में पैसे ट्रांसफर करेगा या फिर दूसरे दोस्त को पूछ रहा था की कितने देर में पैसे मिलेंगे।  

मुझे दोनों का कुछ पक्का नही पता था इसलिए मैंने उसे भी फोन नही किया जिसे पैसे देने थे सोचा पहले पक्का कर लूँ फिर उसे यही बुला कर पैसे दे दूंगा।  उसने भी फोन करके नहीं पूछा।  मुझे बड़ा अजीब लगा बाद में मैंने पूछा भी था की तूने पूछा क्यों नहीं मुझसे तो बोली की मुझे पता था की अगर हो गए तो तू बता ही देगा बस इसलिए ही नहीं पूछा।  

12.30 बजे तक दोनों ने पक्का कर दिया। मैंने अपने दोस्त के एटीएम से 2000 रूपये निकाले और 2000 रूपये अपने एटीएम से निकाले और 1000 रूपये उसने दिए थे।  सब मिला कर 5000 रूपये हो गए और मेरे दूसरे दोस्त ने कहा था की 15000 तो नहीं हो पाये पर 10000 हो गए है 

जब सब से पैसे मिल गए तो मैंने उसे फोन कर दिया की पैसे आ कर ले जा।  आज मैंने फोन करने के चक्कर में कुछ भी काम नही किया, 12.45 हो रहे है और सब काम पड़ा है, सब फाइल्स और पेपर यही पड़े हुए है, इसलिए मैं काम में लग गया।  करीब 30 मिनट्स में मेरी दोस्त मेरे ऑफिस पहुंच गयी मैंने उसे सभी पैसे दे।  वो काफी उदास सी थी मैंने उसका दिल हल्का करने के लिए उसे एक मैसेज किया की बड़ी बन ठन कर आई थी क्या इरादा था, तो उसका मैसेज आया की मैं फ्री हो कर बात करुँगी।  मैंने कहा ठीक है जैसा भी हो बता देना वरना मुझे भी टेंशन रहेगी। मैं इन सब चक्कर में खाना भी नहीं खा पाया और अब 1.30 बज रहा है तो कैंटीन में भी कुछ नहीं मिलेगा।  चलो कोई नहीं मैं खुश हूँ की उसकी टेंशन दूर हो गयी।  

शाम तक मैं रिप्लाई का इन्तेजार करता रहा और सोचता रहा की क्या रहा होगा।  सब ठीक रहा होगा या नहीं पर इसका कोई रिप्लाई नहीं आया।  एक बार को सोचा मैं ही पूछ लू फिर सोचा क्यों परेशान करू बता देगी वो अभी वक़्त नहीं मिला होगा। रात को 9 बजे उसका मैसेज आया की खाना खा लिया ? मैंने हाँ लिखा और शिकायत की की तूने रिप्लाई नही किया मैं इन्तेजार ही करता रह गया तो बोली यार आते ही आंटी ने बुला लिया था घर में मेहमान आये हुए है फिर मैं सो गयी उठी तो घर के सरे काम किया अब फ्री हो कर मैसेज किया है।  मैंने कहा तू अब भी क्यों परेशान सी लग रही है तो वो बोली तुझे कैसे पता चल जाता है, मैंने कहा बता तो बोली कुछ नहीं वो पैसे देने है न बस वही टेंशन है, मैंने कहा की तू टेंशन मत ले बस मुझे 5000 दे देना बाकि मैं खुद कर लूंगा, वो सुबह से परेशान थी मैंने ज्यादा कुछ नहीं कहा और बोला की चल तू थक रही होगी सो जा।  उसने गुड नाईट कर दिया मैंने भी गुड नाईट मैसेज किया और सो गया।  

हमरे बीच बस ऐसे ही चलता रहा सब ठीक ठाक सा।  

15 दिन हो बीत गए उसने पैसे को ले कर कोई बात नहीं की, बात तो दूर की बात है इसने एक बार के लिए ये भी नहीं पूछा की मैंने पैसे उन्हें वापिस भी दिए या नहीं दिए ? और सब कैसा चल रहा है, मैंने भी कुछ नहीं कहा ये सोच कर की अगर होंगे तो ये दे ही देगी।  मैंने जिससे 10000 लिए थे उसे अपनी सैलरी से 5000 दे दिए और बोला की बाकि बाद में दे दूंगा थोड़ी प्रॉब्लम में हूँ, तो वो बोला कोई नहीं मुझे जरुरत भी नहीं है अभी।  

आज इस बात को 3 महीने के करीब हो गए है, इसने इस बारे में कोई बात नही की और न मैंने कुछ कहा।  यहाँ तक की एक बार के लिए भी ये भी नहीं कहा की मैंने पैसे नहीं दे सकती। इसने इस के बारे में कोई बात की ही नहीं जैसे कभी कोई बात हुई ही नहीं हो।  मैंने जो 15000 लिए है सबके पैसे धीरे धीरे थोड़े थोड़े करके लोटा रहा हूँ।  घर के भी फालतू के खर्चे आ जाते है तो पैसे नहीं रहते और मैं किसी से मांग भी नहीं पता क्युकी मैंने सबसे ही थोड़े थोड़े पैसे ले रखे है। घर के खर्च पुरे करने के लिए मैंने अपना फ़ोन भी बेच दिया। पर मैंने उससे कुछ नहीं कहा क्युकी मैं जनता हूँ वो दे नहीं पायेगी। और बेवजह मैं उसे परेशान नहीं करना चाहता।  

इस लड़की से मेरी बात ऐसे ही होती रहती थी हल्की फुल्की।  अब ज्यादा नहीं होती।  मुझे बहुत दुःख होता है, क्युकी मुझे इसकी आदत सी पड़ गयी है।  वरना मुझे साफ़ लगता है की अब इसके दिल में मेरे लिए कोई फीलिंग नहीं है। पर मैं छोड़ भी तो नहीं सकता। क्युकी ये सिर्फ मुझे लगता है। सही है या गलत कुछ नहीं पता।  

अभी 15 दिन पहले की बात है मैं गाँव जा रहा था तो इसका फ़ोन आया और अगले दिन कही बहार घूमने को कहने लगी मैंने कहा की मुझे गाँव जाना है।  तो ये थोड़ी नाराज़ सी हो गयी।  हमें मिले काफी टाइम भी हो गया था तो मैंने कहा की ठीक है मैं एक दिन बाद चला जाऊंगा कल हम घूमने ही चलते है। मैंने भी अपनी वाइफ को कहा की हम कल नहीं जाते, इतने ज्यादा दिन वह रुकेंगे तो अच्छा नहीं लगेगा।  एक दिन बाद जायेंगे।  

अगले दिन इसका 10 बजे मैसेज आया की मैं नहीं जा सकती मेरे घर वाले गाँव जा रहे है मुझे भी जाना पड़ रहा है।  मुझे बहुत बुरा लगा।  मैंने इसके लिए अपना एक दिन लेट कर दिया और अब ये मना कर रही है। फिर मैंने पूछा की अचानक ? तो बोली हाँ मुझे भी अभी बताया।  मैंने कहा की क्या हुआ ? तो बोली मैं आ कर बताउंगी। मुझे ये बात बुरी लगी मैंने कहा मुझे बताने की जरुरत नहीं है जा तू।  तो इसने कहा ये तो कोई बात नहीं है घर के सब जा रहे है मुझे तो जाना ही पड़ेगा फिर इसने फोन किया तो मैंने फोन नहीं उठाया।  और एक मैसेज कर दिया की मुझे तुझसे कोई शिकायत नहीं है पर मेरा फ़िलहाल बात करने का मन नहीं है।  फिर इसका कोई रिप्लाई नहीं आया. रात को सोते टाइम इसका गुड नाईट मैसेज आया।  मैंने कोई रिप्लाई नहीं किया।  अगले दिन इसका गुड मॉर्निगं मैसेज आया मैंने तब भी कोई रिप्लाई नहीं किया।  मैं चाहता था की ये एक बार फोन करके मुझे समझाए।  मुझे भी पता है इसकी कोई गलती नहीं है।  पर फिर भी इसे पहल करनी चाहिए मुझे मनाने के लिए।  

पर फिर आज तक इसका कोई मैसेज नहीं आया।  मुझे इससे ऐसी उम्मीद बिलकुल नहीं थी।  मैं मानता हूँ इसकी गलती नहीं थी पर क्या फिर भी इसे एक बार बात नहीं करनी चाहिए थी ? 

इससे ज्यादा बुरा मुझे तब लगा जब इसकी मम्मी की तबियत ख़राब हो गयी थी और वो हॉस्पिटल में थी तब भी इसने एक बार के लिए ये नही सोचा की मैं इसकी मम्मी को अपनी मम्मी मानता हूँ तो मुझे एक मैसेज ही कर देती।  अगर फिर भी मैं न बात करता तो मेरी गलती थी।  पर इसने मुझे कुछ नहीं बताया।  क्युकी इसके मन में कोई फीलिंग नहीं है और न मुझसे दूर होने का कोई दुख है।  

मेरी इससे अब कोई बात नहीं होती और मुझे पता है वो कभी अब करेगी भी नहीं या कर भी ले तो अब कोई फर्क नहीं पड़ता।  क्युकी मुझे अब यकीन हो ही गया है की उसके दिल में कोई फीलिंग नहीं है क्युकी जहां फीलिंग होती है वो तब भी मना लेता है जब अपनी गलती नहीं होती।  पर फिर भी रात को मुझे मैसेज का इन्तेजार रहता है क्युकी उसकी एक आदत सी पड़ गयी थी।  मैं अपना फोन उठता हूँ देखता हूँ तो दिल करता है किसी से बात करू पर कोई अब है ही नहीं बात करने के लिए।  क्युकी जो दूसरी मेरी आदत में शामिल थी उसे भी गुड नाईट किये बिना और उसका गुड नाईट पढ़े बिना मुझे ढंग से नींद नहीं आती थी अब उससे भी मेरी रात को बात नहीं होती।  उसकी भी मुझे आदत थी।  मुझे बहुत कमी सी लगती है।  सच कहु तो मेरा फोन रखने का भी अब दिल नहीं करता। पर फोन रखना मज़बूरी है। 

दूसरी वाली से मेरी कोई लड़ाई नहीं है पर फिर भी मैं किसी को मजबूर तो नहीं कर सकता न बात करने के लिए।  क्युकी रिश्ते तो दिल से निभाए जाते है जबरदस्ती नहीं।  मुझे रात को इसकी कमी भी बहुत महसूस होती है, पहले हम कितनी बात करते थे मेरी सबसे ज्यादा बात इसी से होती थी।  रात को भी सबसे लेट मैं इससे ही बात करके सोता था।  पर अब तो सब खत्म सा ही है। ऐसा लगता है जैसे अब कुछ नहीं है, बस नाम का ही रिश्ता सा लगता है और मैं ये भी जनता हूँ वो भी ये बात अच्छे से समझती है। मैंने देखा है जब जिंदगी को दुःख देने होते है तो सबसे पहले वो हमारे जो सबसे ज्यादा करीब होते है वो ही दूर हो जाते है, क्युकी जिंदगी को पता है हम कितना भी टूट जाये अपने हमें संभल लेते है, इसलिए वो ऐसा खेल खेलती है जिससे अपनों के बीच में दूरी पैदा हो जाती है।  और जिन्हे हम सबसे ज्यादा अपना मानते है वो ही हमारे साथ हमारे दुःख में नहीं होते।  

Sunday, November 9, 2014

जिंदगी



आज ऑफिस जल्दी जाना है, मैं उठा और वाइफ से बोला उठ जा, आज ऑफिस जल्दी जाना है.

वाइफ : हम्म्म उठ रही हूँ 

मैं नहाने चला गया। 

वापस आया तो वाइफ अभी भी सो रही थी. मैंने उसकी तरफ देखा और बोला उठ जा यार.

वाइफ : ओह्ह मेरी आँख लग गयी थी
मैं : कोई नही 
वाइफ : रोटी बना दू ?
मैं : नही, मैं लेट हो जाऊंगा, बस चाय बना दे। 
वाइफ : अब भूखे पेट जाओगे? अच्छा लगेगा ऐसे?
मैं : यार रोटी के चक्कर में लेट हो जाऊंगा, तू चाय बना रही है तो बना दे वरना वो भी रहने दे। 
वाइफ : ठीक है बना रही हूँ,

मैंने चाय पी और ऑफिस के लिए घर से निकल गया।
बहार स्टैंड पर खड़ा हो कर ऑटो का इन्तेजार कर रहा हूँ लगता है आज लेट हो ही जाऊंगा काफी देर से कोई ऑटो नही आया है. 
कुछ देर बाद एक ऑटो आया और मैं चढ़ गया. ऑटो से मेट्रो और फिर मेट्रो से ऑफिस पहुँच गया. 
ऑफिस पहुँचते ही मैडम बोली की तुम्हे सर पूछ रहे थे, मैं पेन, नोटपैड उठाई और सर के पास चला गया, सर ने कहा ये एक पेपर नही मिल रहा उन सभी फाइल में देखो।
बहुत देर तक मैं वो पेपर देखता रहा पर मुझे मिला नही. 

सर : मिल गया ?
मैं : नही सर, ढूंढ रहा हूँ, 
सर : साल भर लगेगा क्या? आपको तो कुछ नही मिलता, जाओ मेल में देखो, उसमे होगा।

मैं सर के रूम से बहार आया और सिस्टम पर मेल में वो लेटर देखने लगा, थोड़ी सी कोशिश के बाद लेटर मिल गया मैं अंदर गया और लेटर दे दिया। 
वापिस अपने रूम में आया और फाइल और पेपर भेजने के लिए फाइल नंबर डालने लगा.
आज सुबह से सर भारी भारी सा हो रहा है, और खाना नही खाया था सुबह, इसलिए भूख भी लगी है, 
हमारी ऑफिस की कैंटीन में 1 बजे से  1.30 बजे तक खाना मिलता है फिर खत्म हो जाता है, 
12 बज रहे हैं मैं 12.45 पर कैंटीन में चला जाऊंगा वरना फिर भीड़ हो जाएगी, और 12.45 तक सभी फाइल भी डायरी कर दूंगा 
बस अब मेरा काम खत्म होने वाला हैं और 12.45 होने वाले है मैं खाना खा कर आता हूँ पहले। 

अपनी सीट से उठा तो सर का बजर आ गया मुझे अंदर बुला लिया
अंदर जाते ही सर बोले बैठो एक प्रेजेंटेशन बनाना है, 
मैं बैठ गया और प्रेजेंटेशन बनाने लगा 

जब प्रेजेंटेशन कम्पलीट हुआ तो सर बोले इसे थोड़ी देर में फाइनल करते हैं तुम  भी लंच कर लो 

मैंने ठीक है कहा और बहार आ गया, आ कर टाइम देखा तो 1.45 हो चुके थे, यानि अब कैंटीन में कुछ नही मिलेगा, मेरे साथ हमेशा ही ऐसा होता है जिस दिन मैं घर से खाना खा कर नही आता मुझे लंच भी नशीब नही होता, चलो कोई नही वैसे भी अब भूख मर गयी है, 

कुछ देर में कॉफ़ी आ गयी, मैंने कॉफ़ी पी ही थी की सर ने फिर प्रेजेंटेशन फाइनल करने को अंदर बुला लिया, और प्रेजेंटेशन ही फाइनल करने में लगा रहा

सुबह से सर में हल्का हल्का दर्द था अब बढ़ने लगा है, 

प्रेजेंटेशन फाइनल करके मैं वापिस अपने रूम में आया और जो पेपर और फाइल राखी हुई थी उन फाइल्स और लेटर को फिर से डायरी करने लग गया. हमारे यहाँ फाइल्स और पेपर का काम ही ज्यादा होता है। 

फाइल डायरी कर ही रहा था की मैडम बोली की सर ने बोला है की एक मेल आई है वो मेल मिल नही रही है जरा सर्च करो तुम्हे मिल जाती है तो ? उन्होंने मुझे मेल का नाम और सब्जेक्ट बताया। 

मैं डायरी करने के साथ साथ मेल भी देख रहा था 

फिर जब तक बैठा रहा बस ऐसे ही कुछ न कुछ काम में लगा रहा, बस ऐसे ही मेरा पूरा दिन निकल जाता है, पर आज सर बहुत दर्द कर रहा है. चलो आज का दिन तो निकल ही गया बस घर जा कर खा पी कर सो जाना है, सुबह तक ठीक हो जाऊंगा 

मैं घर पहुँच कर लेट गया और आँखे बंद कर ली 

वाइफ : क्या हुआ ?
मैं : कुछ नहीं बस थक रहा हु 
वाइफ : तुम ऑफिस में करते ही क्या हो, जो थक गए, बैठने का ही काम तो है तुम्हारा 
मैं : यार ऑफिस में दिन भर कुछ न कुछ चिक चिक होती रहती है, शरीर से ज्यादा मैं दिमाग से थक जाता हूँ, 
वाइफ : अछा ठीक है हाथ मुह धो लो मैं खाना लगा देती हूँ 

मैं उठा और कपडे चेंज करके हाथ मुह धोने चला गया 
वापिस आ कर मैं खाना खाने बैठ गया 

वाइफ : पता है आज भाभी अपने बच्चे के लिए खाने को लायी थी, और हमारे बच्चे को कुछ दिया तक नही 
मैं : तुझे तो ये ही सब रहता है, मेरे सर में दर्द है मुझे नही सुननी तेरी ये बात 
वाइफ : तुम्हारे तो हमेशा ही सर में दर्द रहता है, जब देखो सर में दर्द है, 
मैं : मैं जान कर तो करता नही, हो जाता है, 
वाइफ : जाओ सब समझती हूँ मैं, तुम मुझसे बात ही नही करना चाहते 
मैं : मुझे अब खाना खाने देगी 
वाइफ : खा लो मैं मना थोड़े ही कर रही हूँ 

9 बज गए है, मैं खाना खा कर आँखे बंद करके लेट गया।  सो जाऊंगा तो सर दर्द ठीक हो जायेगा पर अभी वाइफ के पसंदीदा सीरियल आ रहे है तो टीवी चल रहा है तो नींद भी नहीं आएगी, चलो कोई नहीं 10 बजे तक देखने दो इसे फिर बंद करवा दूंगा। तभी वाइफ की आवाज मरे कानो में पड़ी 

वाइफ : चाय पियोगे 
मैं : बना ले 
वाइफ : आज तुम्हारे हाथ की पीने का मन कर रहा है 
मैं : तुझे बनानी है तो बना ले, मैं तो बनाऊंगा नहीं 
वाइफ : तुम तो मेरे किसी काम नही आते, कभी भी नहीं कहते की मैं बना देता हूँ 
मैं : मेरे लिए चाय मत बनाना 
वाइफ : क्यों ? तुम तो इतनी जल्दी बुरा मान जाते हो 
मैं : वो बात नहीं है, नींद आ रही है, चाय पिने के बाद नींद नहीं आएगी फिर 
वाइफ : थोड़ी सी पी लेना मैं बना रही हूँ 
मैं : नही मैं नही पियूँगा 
वाइफ : ठीक है 
(पता नहीं क्यों मैं बहुत चिड़चिड़ा सा हूँ, जब एक बार कोई मना कर देता है या एक बार कहने पर नहीं करता है तो मेरा दिल हट जाता है उस काम को करने से, इसलिए मैं नही करता फिर )

10 बज गए हैं मैं वाइफ से बोल देता हूँ टीवी बंद करने को.

मैं : टीवी बंद कर दे यार, सो जाते है, आज मेरे सर में भी दर्द है 
वाइफ : बस ये 2 सीरियल और देखने दो 
मैं : (उसके 2 सीरियल का मतलब 11 बजे तक) यार बंद कर दे, सीरियल कोई मुझसे ज्यादा थोड़े ही है, मेरे सर में दर्द है 
वाइफ : बस ये देख लू कर दूंगी बंद 
मैं : यार सीरियल तो दिन में भी आते है तब देख लेना 
वाइफ : मुझे दिन में बिलकुल टाइम नही मिलता, टीवी बिलकुल भी नहीं चलती मैं 
मैं : ठीक है देख ले 

मैं आँखे बंद करके लेट गया और सोचने लगा की क्या मेरी लाइफ ऐसे ही बीतेगी, जहा सीरियल मुझसे ज्यादा है, ऐसे ही चलता रहा तो लाइफ कैसे कटेगी पूरी, मैं सोना चाहता हूँ, पर कानो में टीवी की आवाज पड़ रही है और मैं सो नहीं पा रहा हूँ, 

(काफी देर तक मैं ऐसे ही सोचो में गुम रहा) अब 11 बजने वाले है, चलो अब तो सो ही जाऊंगा 

मैंने आँखे खोली तो वाइफ सो रही थी, 

मैं : जब तुझे सोना ही था तो टीवी बंद कर देती 
वाइफ : हां मेरी आँख लग गयी थी 
मैं : अब टीवी बंद कर दे 
वाइफ : हाँ कर रही हूँ 

वो उठी और टीवी बंद कर दिया, मैं आराम से लेट गया और सोचा चलो अब तो आराम से सो जाऊंगा और सुबह तक ये सर दर्द ठीक हो ही जायेगा, कुछ ही देर में मेरी आँख लग गयी 

अचानक मेरे कानो में बर्तन के खड़कने की आवाज आई और मेरी आँखे खुल गयी, रूम की लाइट जल रही थी, मैंने वाइफ से पूछा की क्या कर रही है तो बोली दूध गरम कर रही हूँ, मैंने कहा की तब से गरम नही कर सकती थी, जब मैं सोने वाला हूँ तभी तू ऐसे काम किया कर 

(कहाँ तो मैं 9 बजे से सोने की सोच रहा हूँ और कहा अब 11.30 हो रहे है)
 
कुछ देर बाद दूध गरम हुआ फिर वाइफ ने लाइट बंद की और वो सो गयी, पर मेरी आँखों में नींद उड़ चुकी थी मैं 10 मिनट् सो गया था इसलिए अब नींद जल्दी नही आएगी, और सर में दर्द और ज्यादा हो गया है,

अब मेरा मन और दुखी सा हो रहा है, क्यों मुझे कोई ऐसा नही मिलता जो मुझे समझ सके, कभी सोचता था की वाइफ आएगी तो कम से कम वो तो फ़िक्र करेगी ही पर क्या मेरी वाइफ को मेरी फ़िक्र है, शायद होगी ही, मैं इसका पति जो हु, पर फिर मुझे क्यों नही लगता, 
क्या ये ही प्यार है, जहाँ कोई फीलिंग ही न हो, जिंदगी में हम कितने सपने सजाते है, पर सब पूरे नहीं होते पर फिर भी कही न कही हम एक उम्मीद तो रहती है, पर मेरी सभी उम्मीद अब खत्म हो गयी है, क्युकी अब कोई मेरी जिंदगी में नही आ सकता। कुछ दोस्त है जिनसे मेरी साँसे चल रही है, जब वाइफ से दुःख होता है तो उनसे बात करके लगता है चलो कोई तो है जिसे फ़िक्र है, बेसक पूरी जिंदगी साथ न दे पर जब तक है तो मैं खुश हो रहता हूँ। 

अगर मेरे दोस्त मेरी लाइफ में न हो तो ?? नहीं नहीं ऐ खुदा ऐसा कभी मत करना वरना मैं बहुत अकेला हो जाऊंगा, मेरे दोस्त मेरे जीने की वजह है, मेरे दोस्तों के सिवा मेरी लाइफ में अब है ही क्या ?
 
काफी देर तक ये सब ही सोचता रहा फिर मोबाइल उठा कर टाइम देखा तो 12.15 हो रहे थे पर अभी नींद का पता नही था की कब आएगी, बस दिमाग में ऐसी ही अच्छी - बुरी बाते आती रही और मैं कब सो गया मुझे पता नही 

Thursday, October 16, 2014


जो टूट कर बिखरा हो 
उसका संभलना आसान नहीं होता 
हर कोई इस दिल का मेहमान नहीं होता 
जिसने कांटो के बीच से फूल चुना हो 
वो कांटो की चुभन से अनजान नहीं होता 
ये तेरी बेरुखी है तो ये ही सही 
किसी के लिए जीना या मरना आसान नहीं होता 
तुमने कर ली है दूरिया पैदा तो खुश रहना  
जो अपना होता है उनका ये काम नहीं होता 

Sunday, July 13, 2014

फिर दिल लगाने की सजा


फिर दिल लगाने की सजा हमने कुछ ऐसे पायी है, 
करवटे बदल-बदल कर पूरी रात बितायी है। 
दिल से किसी को चाहने की बस सजा ही मिलती है,
ये बात फिर दिल टूटने के बाद समझ में आई है। 
उसे फर्क नहीं पड़ता मेरे होने या न होने से, 
जिसके यादे मैंने अपनी धड़कनो में बसाई है। 
क्या मिला किसी को अपनी जान से भी ज्यादा चाहने से, 
गम और यादो की दौलत हमने तोहफे में पायी है।  

Thursday, May 22, 2014

बड़ी अजीब सी हालत है

बड़ी अजीब सी हालत है, तू दूर भी है पास भी,
तू ही मेरी धड़कन है, तू ही मेरा एहसास भी।
लिख तो दी हैं किश्मत ने हमारे बीच दूरी, 
पर इस दिल में तुझे पाने का है विश्वास भी
दिल करता है काश तुझे लगा लूँ सीने से,
तू ही मेरी जिंदगी है अब तू ही मेरी प्यास भी

Tuesday, May 20, 2014

एक बात कहुँ तुमसे

एक बात कहुँ तुमसे
तुम मेरी बन जाओ ना
नहीं लगता कही मन मेरा 
तुम मेरी जिंदगी बन जाओ ना 
आखिर क्यों लिखी किस्मत ने दूरी 
तुम तोड़ के सारे बंधन बस 
मेरी बन जाओ ना 
कैसे कटता है हर एक पल तेरे बिना 
तुम आ कर मेरे दिल की धड़कन बन जाओ ना 
क्यों खुदा ने तुम्हे मेरा नहीं बनाया 
अब तुम ही उससे शिकायत करो ना 
बस मैं अब कुछ नही जानता 
तुम मेरी बन जाओ ना

Wednesday, March 19, 2014

फिर वही .......


आज बहुत दिनों बाद कुछ लिखने बैठा हूँ, कुछ ग़ज़ल या शायरी से अलग अपने दिल कि बात।  क्यों लिखता हूँ मुझे नही पता बस लगता हैं अपने अंदर नहीं रख सकता इसलिए लिख देता हूँ।   

बात वही है जो पहले थी, प्यार और विश्वाश। 

मैंने अपनी जिंदगी में प्यार कि कमी बहुत महसूस कि हैं इसलिए ही जब भी किसी से प्यार मिला बस जी-जान से उसी का हो गया। पर बात फिर वही आ जाती है, ये जरुरी नहीं होता कि सबकी सोच हमारे जैसी ही हो और दूसरा भी हमें वैसा ही प्यार करे जैसा हम करते हैं। 

सब कहते सब हैं कि प्यार और विश्वाश दुबारा नहीं होता लेकिन ऐसा नहीं है, प्यार भी दुबारा हो जाता हैं, और उतना ही जितना पहली बार होता है। मुझे भी हो गया और शायद मैं ही पागल था जो दुबारा किसी को प्यार किया और उस पर विश्वाश किया।  प्यार मैं क्या करू मैं भूखा हूँ प्यार का, जैसे भूखा रोटी के लिए दुखी रहता है मैं प्यार के लिए रहता हूँ, जितना मैं किसी को प्यार करता हूँ उतना मुझे क्यों नहीं मिलता। क्या ये मेरी गलती है कि मैं किसी को प्यार करता हूँ तो उस पर जान भी दे सकता हूँ।  

पता नहीं लोग क्यों झूठ बोलते हैं और क्यों सच्ची बात छिपाते हैं । मैं किसी पर इतना विश्वाश करता हूँ और वो मुझे अपनी बात न बताये या झूठ बोले ये मुझसे बर्दाश्त नहीं होता, क्या करू मैं।  क्या सबको दुःख पहुँचने के लिए मैं ही मिलता हूँ।  


मैं अपनी यादे अब किसी के लिए बेकरार ना करू, 
चाहे मौत मिले या जिंदगी, किसी का इन्तेजार ना करू।  
ऐ खुदा अगर सुनता हैं मेरी दुआ तो बस इतना करना, 
जिंदगी में मैं अब किसी से प्यार ना करू।  

Tuesday, February 11, 2014

नया दिन है

नया दिन है, नयी उमंग है, नया है सवेरा,
पल पल इंतज़ार है, कब आयेगा पैगाम तुम्हारा ?
 तुम जो मिलते हो, फिर मिल कर बिछड़ जाते हो,
किसी दिन मेरी जान ले लेगा, अंदाज़ ये तुम्हारा।
तुम किसी को देख कर ऐसे न मुस्कुराया करो, 
किसी को भी पागल बना सकता है, चेहरा तुम्हारा।
बस एक छोटी सी गुजारिश है अगर मान लो, 
कभी दूर ना जाना तोड़ कर दिल हमारा।


Thursday, February 6, 2014

मेरा देश महान

भीख मांगते बच्चे देखे,
पल पल दुःखी देखा इंसान।
क्या होगा अब देश का,
अब तो भला करे भगवान।
हो जाते है करोड़ो के घोटाले,
और गरीबी से मर जाते हैं किसान।
जिसका जो हो उसे मिलता नहीं,
बिच में खा जाते हैं बेईमान।
इतिहास गवाह है देश का,
यहाँ रहे हमेशा हिन्दू और मुसलमान।
ना वो बन सके कभी भारतीय,
और ना बन सके एक अच्छा इंसान।
लड़ने लगते हैं जात-धर्म के नाम पर,
भूल जाते हैं कि वो हैं एक इंसान।
जानवर बन कर छीन लेते हैं,
एक बच्चे से भी उसकी पहचान।
ये हैं मेरे देश कि हालत,
फिर भी हो रहा हैं भारत निर्माण।
अब तो बस भला करे भगवन।
अब तो बस भला करे भगवन।
 

Tuesday, January 28, 2014

हाय मैंने क्यों प्यार कर लिया

हाय मैंने क्यों प्यार कर लिया 
खुद को क्यों बेक़रार कर लिया 
तड़प कर देख लिया किसी कि यादो में 
मौत से भी ज्यादा इंतज़ार कर लिया 
 हाय मैंने क्यों प्यार कर लिया 

वक़्त बदलेगा तो लोग भी बदल जायेंगे 
हम तन्हा थे तन्हा ही रह जायेंगे 
क्यों किसी पर मैंने इतना ऐतबार कर लिया 
हाय मैंने क्यों प्यार कर लिया
हाय मैंने क्यों प्यार कर लिया