Monday, April 23, 2018

कई रंग देखें हैं जमाने में

कई रंग देखें हैं जमाने में, 
मोहब्बत के सिवा कोई रंग भाया ही नहीं।
रूठा वो शख्स ऐसा हमसे,
ख्वाबों में भी कभी आया ही नहीं।
चेहरा देख कर पूछते थे मुस्कुराने की वजह,
दिल का दर्द जो हमने कभी सुनाया ही नहीं।
एक वो ही है जो दिल से नहीं जाता,
और कोई दूसरा दिल में कभी समाया ही नहीं।
जो दिल फिदा हो कभी 'साहिल' पर,
वो दिल खुदा ने कभी बनाया ही नहीं।

Tuesday, April 17, 2018

ख्यालो का सिलसिला


ख्यालो का सिलसिला बस,
यूं ही चलता रहता है।
उठते हैं जज्बात कई,
दिल मचलता रहता है।
रंजिशें दुनिया की अब सोने नहीं देती,
हर रोज़ किसी का घर जलता रहता है।
बंद नज़र आता है हर रास्ता 'साहिल' का,
बस एक उम्मीद का दिया जलता रहता है।


Thursday, March 8, 2018

ढूंढते रहे दिल हाथो में ले कर,

ढूंढते रहे दिल हाथो में ले कर, 
जमाने में हमें कहीं वफ़ा ना मिली।
वो चिराग इतराये बहुत खुद पर, 
जिन्हें जलने के बाद कभी हवा ना मिली ।

उसकी दीवानगी हमारे दिल पर
कुछ इस तरह से काबिज़ रही,
जैसे किसी बीमार को 
कभी कोई दवा ना मिली।

वो खुद जा कर डूब गया 
गहरे बीच समुन्द्र में,
शिकायत उसे बस ये रही कि 
उसे 'साहिल' की राह ना मिली।

ख्वाबों में भी मिलना


ख्वाबों में भी मिलना उसे गँवारा नहीं होता।
एक वो ही शक्स है तो हमारा नहीं होता।
कहने के लिए तो जमाना अपना है मगर।
टूटे हुए दिल का कोई सहारा नहीं होता।
जाने क्या कमी रह गयी है हम में,
हम सबके हो जाये भी तो कोई हमारा नहीं होता ।

Wednesday, September 13, 2017

पलकों में हमे भी कहीं तुम


पलकों में हमे भी कहीं तुम, छुपा लिया करो
वक़्त-बे-वक़्त कभी हमें भी, चाह लिया करो
माना के गर्दिशें लाख सही जमाने की मगर
निकाल कर वक़्त थोड़ा, मुस्कुरा लिया करो
ये मौसम जो गुजरा, लौट कर फिर नहीं आएगा
इस मौसम का लुत्फ भी कभी, उठा लिया करो
ये दिललगी है अगर तो दिललगी ही सही
इस दिललगी मे भी कभी दिल, लगा लिया करो

Friday, July 22, 2016

मृत्यु



मृत्यु एक शाश्वत सत्य है, इसे न टाला जा सकता है और न ही बदला जा सकता है। किसी की मृत्यु के पीछे जो इश्वर का उदेश्य होता है हम उसे कभी नहीं समझ सकते, क्योंकि हमारी चेतना अभी इतनी प्रबल नहीं है कि हम ईश्वर की करनी को समझ सकें। वो ईश्वर है, सबसे बड़ा है, उसकी हर अच्छी और बुरी करनी के पीछे एक उदेश्य छिपा होता है जो हम तुच्छ प्राणीयों की कल्पना से भी परे है। (दिया हुआ चित्र इसी बात की पुष्टि करता है)

‪#‎गीता में लिखा है :- मनुष्य जैसे पुराने वस्त्रों को छोड़कर नये वस्त्र धारण कर लेता है वैसे ही आत्मा पुराने शरीर को छोड़कर दूसरे नये शरीर में चली जाती है। तेइसवें श्लोक में बताया गया है कि शस्त्र इस आत्मा को काट नहीं सकते, अग्नि इसको जला नहीं सकती, जल इसको गीला नहीं कर सकता और वायु इसको सुखा नहीं सकती अर्थात् प्रत्येक स्थिति में यह आत्मा अपरिवर्तनीय रहती है। सत्ताइसवें श्लोक का अर्थ है कि पैदा हुए मनुष्य की मृत्यु अवश्य होगी और मरे हुए मनुष्य का जन्म अवश्य ही होगा। इस जन्म व मरण रूपी परिवर्तन के प्रवाह का निवारण नहीं हो सकता। अतः जन्म व मृत्यु होने पर मनुष्य को हर्ष व शोक नहीं करना चाहिये।

‪#‎कुरान में लिखा है:- (42) और जो लोग आस्थावान हुए और उन्होंने भले कर्म किये, हम किसी व्यक्ति पर उसकी क्षमता से अधिक बोझ नहीं डालते हैं, यही लोग जन्नत वाले हैं वह उसमे सदैव रहेंगे। (43) और उनके सीने की प्रत्येक खटक को हम निकल देंगे। उनके नीचे नहरे बह रही होंगी और वह कहेंगे कि सम्पूर्ण प्रसंशा अल्लाह के लिए है जिसने हमको यहाँ तक पहुँचाया और हम मार्ग पाने वाले न थे यदि अल्लाह हमारा मार्गदर्शन न करता। हमारे पालनहार के संदेष्टा सच्ची बात लेकर आये थे। और पुकारा जायेगा की यह जन्नत है जिसके तुम उत्तराधिकारी घोषित किये गये हो अपने कर्मो के बदले। (सूरह अल-आराफ़)

‪#‎विज्ञान के अनुसार:- समानांतर ब्रह्माण्ड यानि संभावनाओं के असंख्य ब्रह्माण्ड, जितनी संभावनाएं उतने ही ब्रह्माण्ड। इसके आधार पर हम कह सकते हैं कि इस बात की भी सम्भावना है कि हमारे ब्रह्माण्ड के समानांतर एक ऐसा ब्रह्माण्ड भी हो सकता है जिसमे वह व्यक्ति जिन्दा हो और अपना जीवन व्यतीत कर रहा हो और हम सब उसके साथ घूम रहे हो व हंसी-मजाक कर रहे हो, इस बात से बिलकुल बेखबर की हमारे जैसे एक समानांतर ब्रह्माण्ड में उसकी मृत्यु हो चुकी है।

इन सब बातों को पढ़ कर बस इतना ही समझ आया है कि कोई भी प्राणी पूर्ण रूप से लुप्त नही होता, वह कहीं-न-कहीं होता जरूर हैं। और सच भी है, कोई मृत्यु को प्राप्त होने के पश्चात भी हमारे हृदय में, हमारे मस्तिष्क, हमारी स्मृति में, हमारे बीते हुए कल में वो व्यक्ति हमारे साथ ही होता है।

आज की बात मैं समर्पित करता हूँ उसे जो आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन हमारे हृदय और मस्तिष्क से उसकी स्मृति कभी लुप्त नहीं हो सकती। बेशक हम उन्हें न कुच्छ दे सकते हैं और न ही उनके लिए कुच्छ कर सकते हैं पर हम उनके लिए ईश्वर से प्रार्थना जरूर कर सकते हैं कि ईश्वर उनकी आत्मा को शांति और मोक्ष प्रदान करे और साथ ही ईश्वर हर उस प्राणी को शांति व मोक्ष प्रदान करे जो मृत्यु को प्राप्त हुआ है और उनके परिवार वालो और अपनों को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करे।

Wednesday, December 9, 2015

वक्त की बारिश में

वक्त की बारिश में सबको फिसलते देखा है
जो अपने थे उन सबको धीरे धीरे बदलते देखा है।।
वादा किया था सबने हर वक्त साथ निभाने का,
मैने उन सब वादो को भी पिघलते देखा है।।

जरूरत के तराजू में जब भी किसी दोस्त ने हमें तोला,
दिल निकाल कर रख दिया और मुह से कुछ ना बोला
पर जब किसी की दोस्ती मेरे लिए जरूरी थी,
तो पता लगा उनकी अपनी कोई मजबूरी थी।।